
मेरी साधना यात्रा – भाग 3साधना से सेवा तक की यात्राप्रभु की कृपा का स्पर्श पाने के बाद मैंने यह अनुभव किया कि साधना केवल स्वयं के लिए नहीं होती। जो पीड़ा मैंने सहन की, जो आँसू मैंने बहाए और जो अंधकार मैंने देखा, वह केवल मेरी व्यक्तिगत यात्रा नहीं थी; वह मुझे एक बड़े उद्देश्य की ओर ले जा रही थी।धीरे-धीरे मेरे भीतर एक भाव जागृत होने लगा—यदि मेरे घाव मुझे प्रभु तक ले जा सकते हैं, तो शायद मेरी यात्रा किसी और के लिए आशा का दीपक भी बन सकती है।मैंने अपने जीवन में अनेक प्रकार के दुःख देखे हैं—निराशा, अकेलापन, टूटन, भय, असहायता और मन की गहरी पीड़ा। इसलिए जब कोई पीड़ित व्यक्ति मेरे पास आता है, तो मैं उसके शब्दों से पहले उसके दर्द को महसूस करने का प्रयास करती हूँ।मैं स्वयं को किसी चमत्कार का केंद्र नहीं मानती। मैं केवल एक साधक हूँ, जिसने अपने जीवन में यह सीखा है कि करुणा, प्रार्थना, धैर्य और ईश्वर में विश्वास मनुष्य को फिर से खड़ा होने की शक्ति दे सकते हैं।मेरी साधना ने मुझे सिखाया कि हर व्यक्ति अपने भीतर एक प्रकाश लेकर जन्म लेता है। कभी-कभी परिस्थितियाँ उस प्रकाश को ढँक देती हैं, पर वह प्रकाश समाप्त नहीं होता। उसे केवल जागृत करने की आवश्यकता होती है।इसी भावना के साथ मेरी यात्रा सेवा की ओर बढ़ी।आज मेरी प्रार्थना केवल अपने लिए नहीं है। मेरी प्रार्थना उन सभी लोगों के लिए है—जो मानसिक पीड़ा से गुजर रहे हैं।जो जीवन में निराशा और अकेलेपन का अनुभव कर रहे हैं।जो अपने भीतर शांति की खोज कर रहे हैं।जो ईश्वर से दूर महसूस करते हैं, पर उनके हृदय में अब भी एक पुकार जीवित है।और उन सभी आत्माओं के लिए, जो अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ना चाहती हैं।मैंने जाना है कि कभी-कभी किसी व्यक्ति को उपदेश नहीं, बल्कि सुनने वाला एक हृदय, आशा का एक शब्द और विश्वास की एक छोटी-सी किरण चाहिए होती है।यदि मेरी साधना, मेरे अनुभव और मेरे शब्द किसी एक व्यक्ति के जीवन में भी साहस, शांति या आशा जगा सकें, तो मैं इसे प्रभु की कृपा मानूँगी।मेरी यात्रा अभी समाप्त नहीं हुई है। मैं आज भी सीख रही हूँ, आज भी साधना कर रही हूँ और आज भी उसी परम सत्य की खोज में एक यात्री हूँ।और आज मेरी सबसे बड़ी प्रार्थना यही है—”हे प्रभु, जिस प्रकार आपने मेरे अंधकार में प्रकाश दिया, उसी प्रकार मुझे भी ऐसा माध्यम बनाइए कि मेरे शब्द, मेरी प्रार्थनाएँ और मेरी करुणा किसी पीड़ित हृदय के लिए आशा का दीप बन सकें।”मेरे लिए साधना का अंतिम अर्थ यही है—स्वयं को प्रभु में समर्पित कर देना और फिर उसी प्रेम को संसार के कल्याण में प्रवाहित होने देना।🕉️🔥🌙






